वास्तु पद: 64 और 84 वाली पद्धतियाँ
पद वास्तु पुरुष मंडल के जाल के छोटे-छोटे चौकोर हिस्से हैं। इन्हें समझ लें, तो आप दिशाओं की मोटी-मोटी बातों से आगे बढ़कर हर कमरे की सटीक जगह तय कर सकते हैं।

पद क्या है?
पद वास्तु मंडल का एक चौकोर हिस्सा है। 64 पदों वाली पद्धति में ऐसे 64 पद होते हैं, और हर पद के अपने गुण और अपने स्वामी देवता होते हैं (देखें वास्तु देवता)।
वास्तु की पारंपरिक प्रथा में सबसे ज़्यादा ध्यान प्रवेश द्वार वाले पद पर दिया जाता है, फिर बेडरूम और रसोई वाले पदों पर। जानकार कुछ स्वामी देवताओं को अनुकूल और कुछ को चुनौती भरा बताते हैं। ये परंपरा की व्याख्याएँ हैं, नापे-तौले नतीजे नहीं।
हर पद की चार बातें होती हैं: जाल में उसकी जगह, उसका स्वामी ग्रह या देवता, उसके ख़ास गुण, और संतुलन बिगड़े तो उसके उपाय।
64 पदों वाली पद्धति (8×8 जाल)
64 पदों वाली पद्धति आपकी जगह को 8 कॉलम और 8 पंक्तियों में बाँटती है, यानी 64 अलग-अलग पद। यह जाल चारों मुख्य दिशाओं से मिलाकर बिछाया जाता है, और दोनों धुरियों के आर-पार पूरी तरह एक जैसा होता है। आठों दिशाओं में से हर एक के अपने ज़ोन में 8 पद होते हैं; चारों कोनों में, जहाँ दो ज़ोन मिलते हैं, 4-4 पद होते हैं।
| दिशा | पद | किसके लिए अच्छा / किससे बचें |
|---|---|---|
| उत्तर (कुबेर) | 1–16 | अच्छे पद: 2, 3, 6, 7, 10, 11, 14, 15 — ऑफ़िस, प्रवेश द्वार, तिजोरी (3, 11), कैश काउंटर (2, 3, 10, 11) बचें: 4, 5, 12, 13 (बीच की ओर) — मुख्य दरवाज़े के लिए बहुत बीच में |
| दक्षिण (यम) | 17–32 | नेतृत्व या अधिकार वाले काम का ऑफ़िस: 18, 19, 22, 23। मास्टर बेडरूम, अगर कोई और चारा न हो: 22, 23 बचें: प्रवेश द्वार — सिर्फ़ ख़ास कामों (क़ानून, सरकारी) के लिए, घरों के लिए ठीक नहीं |
| पूर्व (इंद्र) | 33–48 | प्रवेश द्वार: 34, 35, 38, 39, 42, 43, 46, 47 (ख़ासकर 35, 39)। रचनात्मक काम की जगह: 34, 35, 38, 39। पढ़ाई: 38–40, 46–48। पूजा: 40, 48 बचें: बीच की ओर वाले 36, 37, 44, 45 |
| पश्चिम (वरुण) | 49–64 | बेडरूम: 50, 51, 54, 55। गेस्ट रूम: 51, 55, 56, 60। लाइब्रेरी या स्टडी: 50, 51, 54, 55। मेहमाननवाज़ी वाले कारोबार का प्रवेश द्वार: 51, 55, 59, 63 बचें: मुख्य कारोबार का प्रवेश द्वार — स्वागत भरा तो लगता है, पर उसमें जोश नहीं होता |
| कोना | पद | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| ईशान कोण (ब्रह्मा) | 40, 48, 56, 64 | पूजा घर या मंदिर (ख़ासकर 40, 56), मुख्य द्वार, ध्यान — उत्तर-पूर्व का हर पद शुभ है |
| वायव्य कोण (वायु) | 8, 16, 56, 64 | गेस्ट रूम (ख़ासकर 16, 56), परिवार के साथ बैठने की जगह, सेवा वाले कारोबार का प्रवेश द्वार |
| आग्नेय कोण (अग्नि) | 33, 41, 24, 32 | रसोई (ख़ासकर 33), सक्रिय काम की जगह, जिम, रेस्टोरेंट का प्रवेश द्वार (ख़ासकर 24, 33) |
| नैऋत्य कोण (नैऋति) | 17, 25, 49, 57 | मास्टर बेडरूम (ख़ासकर 25, 49), तिजोरी या कीमती सामान की जगह, परिवार को ठहराव देने वाली जगह (25, 57) |
बीच के पद
64 पदों के जाल का केंद्र किसी एक पद पर नहीं पड़ता; बीच में चार पद मिलते हैं (36, 37, 44, 45)। यहाँ कभी दरवाज़े या भारी चहल-पहल नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यही पूरे जाल का संतुलन थामे रहते हैं। ध्यान, मनन या कुछ पल ठहरना ठीक है; भारी भाग-दौड़ नहीं।
इसे अमल में कैसे लाएँ
- अपने फ़्लोर प्लान पर 8×8 का जाल बिछाएँ, असली उत्तर दिशा से मिलाकर
- देखें कि आपके कमरे किन पदों में हैं
- ऊपर की तालिकाओं से मिलाकर देखें कि जगह ठीक है या नहीं
- जहाँ मेल न बैठे, वहाँ कमरा हटाने की बजाय रंग, शीशे, पौधों या तत्वों से ऊर्जा को संतुलित करें
- एक बार में एक ही बड़ा बदलाव करें और देखें कि उसका क्या असर होता है
84 पदों वाली पद्धति
84 पदों वाली पद्धति ज़्यादा उन्नत और ख़ास जानकारों की चीज़ है। यह सीधा-सादा जाल कम, और एक-दूसरे के भीतर बने घेरों व बारीक गणितीय अनुपातों पर टिकी बनावट ज़्यादा है। इसमें हर मुख्य दिशा के पद 8 से बढ़कर 12 हो जाते हैं, और हर कोने के 4 से 6। फिर भी अपनी-अपनी दिशा पर मुख्य 8 देवताओं का ही राज रहता है, बस छोटे-छोटे उप-समूहों में।
64 पदों वाली पद्धति के मुकाबले इसका चलन कम है, पर नया घर बनाते या मरम्मत की बारीक योजना बनाते समय यह ज़्यादा सटीक रहती है। आम तौर पर इसे घर का मालिक अकेले नहीं, किसी जानकार की मदद से अपनाता है।
| पद | किस पर ज़ोर | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| 1–3 | रिश्तों और जान-पहचान से आने वाला धन | साझेदारी वाले ऑफ़िस, लोगों से मिलने-जुलने की जगहें |
| 4–6 | सीधी समृद्धि (सबसे प्रबल) | पैसों के लेन-देन के केंद्र, बैंकिंग, नकदी का काम, तिजोरी |
| 7–9 | संतुलन के साथ धन | लंबे समय की आर्थिक योजना, परिवार की जमा-पूँजी |
| 10–12 | जहाँ धन और विवेक मिलते हैं | दान-पुण्य, सोच-समझकर चलाया गया कारोबार |
| पद | किस पर ज़ोर | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| 13–15 | काम से आने वाली ताक़त | प्रोजेक्ट संभालना, रोज़ का कामकाज |
| 16–18 | शुद्ध अधिकार (सबसे प्रबल) | नेतृत्व वाले ऑफ़िस, क़ानूनी काम |
| 19–21 | विवेक से सधी हुई ताक़त | मार्गदर्शन, अनुभव और अधिकार के साथ सिखाना |
| 22–24 | परिपक्व, जमा हुआ अधिकार | वरिष्ठ नेतृत्व; अगर कोई और चारा न हो, तो बेडरूम के लिए दक्षिण के सबसे सौम्य पद |
| पद | किस पर ज़ोर | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| 25–27 | काम करते-करते आगे बढ़ना | बिक्री, मार्केटिंग और कारोबार बढ़ाने के काम |
| 28–30 | सबसे साफ़ सोच (सबसे प्रबल) | मुख्य द्वार, रचनात्मक काम के ऑफ़िस, स्टूडियो, स्कूल |
| 31–33 | ऐसी स्पष्टता जिसमें समझदारी भी घुली हो | सोच-समझकर योजना बनाना और नाप-तौलकर विस्तार करना |
| 34–36 | तरक्की, जो धीरे-धीरे समझदारी की ओर ले जाए | आध्यात्मिक शिक्षा, मार्गदर्शन, पढ़ाई-लिखाई के केंद्र |
| पद | किस पर ज़ोर | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| 37–39 | ठहराव, साथ में आत्म-चिंतन | एकांत या सेहत सुधारने की जगह, गहरी पढ़ाई |
| 40–42 | पूरा ठहराव (आराम के लिए सबसे प्रबल) | मास्टर बेडरूम, उपचार केंद्र, लाइब्रेरी |
| 43–45 | काम पूरा होने का संतोष, साथ में पूर्णता का भाव | परिवार के बेडरूम, मेहमानों की जगह |
| 46–48 | आराम भी, मेल-जोल भी | गेस्ट रूम, मेहमाननवाज़ी, मिलने-बैठने की जगह |
| पद | किस पर ज़ोर | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| 49–51 | सबसे पवित्र हिस्सा — पूरे मंडल के सबसे शुभ पद | मंदिर, पूजा घर, ध्यान की जगह |
| 52–54 | ज्ञान, जो चारों ओर फैलता है | स्कूल, लाइब्रेरी, उपचार केंद्र |
| पद | किस पर ज़ोर | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| 55–57 | मेल-जोल और आपसी सहारा | गेस्ट रूम, मीटिंग रूम, स्वागत भरा प्रवेश |
| 58–60 | आवाजाही और रिश्तों का फैलाव | परिवार के साथ बैठने की जगह, सामाजिक मेल-मिलाप की जगह |
| पद | किस पर ज़ोर | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| 61–63 | तेज़ बदलाव — शुद्ध अग्नि | रसोई, खाना पकाना, रेस्टोरेंट का प्रवेश द्वार |
| 64–66 | सोचा-समझा, मकसद वाला बदलाव | काम की जगह, स्टूडियो, कसरत की जगह |
| पद | किस पर ज़ोर | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| 67–69 | सबसे गहरी सुरक्षा और स्थिरता | मास्टर बेडरूम, तिजोरी / कीमती सामान की जगह |
| 70–72 | मज़बूती, जो चारों ओर फैले | परिवार को थामकर रखने वाली जगह, घर का ऑफ़िस |
घर के बीच वाले हिस्से को अलग-अलग परंपराएँ तीन तरह से बरतती हैं। कुछ इसे पूरी तरह खुला छोड़ती हैं, और अनुभवी वास्तु जानकार ज़्यादातर यही पसंद करते हैं। कुछ इसमें 1–4 पद रखती हैं, पर सिर्फ़ हल्की-फुल्की आवाजाही के लिए। और कुछ इसे केवल ब्रह्मा का पवित्र स्थान मानती हैं। तरीका कोई भी हो, यहाँ न कोई दरवाज़ा हो, न कोई भारी काम-काज।
पद्धतियों की तुलना
| 64 पद | 81 पद | |
|---|---|---|
| सरलता | आसान — 8×8 का ग्रिड | ज़्यादा बारीक और पेचीदा |
| किस काम के लिए सबसे अच्छा | ज़्यादातर घरों के लिए ठीक बैठता है | बारीक डिज़ाइन का काम, अनुभवी जानकारों के लिए |
| कितना आसान | घर के मालिक खुद सीख और लगा सकते हैं | अक्सर किसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी पड़ती है |
| इसे कब अपनाएँ | बने हुए घर में सुधार करते समय | नया घर बनाते समय या बड़ी मरम्मत में |