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भाग 7/13प्रवेश द्वार का वास्तुपढ़ने में 5 मिनट
प्रवेश द्वार का वास्तु

प्रवेश द्वार का वास्तु

पारंपरिक वास्तु में प्रवेश द्वार पर खास ध्यान दिया जाता है, क्योंकि घर में आने का मुख्य रास्ता वही है।

ऊपर से दिखता एक खुला मुख्य दरवाज़ा, जिससे नपी-तुली रेखा में रोशनी घर के अंदर आ रही है
प्रवेश द्वार की जाँच इसी से शुरू होती है कि दरवाज़ा घर की सीमा पर ठीक-ठीक कहाँ है।

पारंपरिक वास्तु मुख्य द्वार को बाहर और भीतर के बीच का अहम पड़ाव मानता है। वास्तु के जानकार देखते हैं कि द्वार किस दिशा में है, सीमा पर ठीक किस जगह है, वहाँ रोशनी कैसी है और आने-जाने के लिए कितनी खुली जगह है।

प्रवेश द्वार सबसे अहम क्यों

वास्तु के कुछ ग्रंथ प्रवेश द्वार को घर का मुख कहते हैं। व्यवहार में इसका मतलब इतना है कि रास्ता खुला रहे, साफ़ दिखे, सुरक्षित हो और आने-जाने में आसान हो।

शुरुआत प्रवेश द्वार से करें — कई वास्तु जानकार सबसे पहले प्रवेश द्वार ही देखते हैं। यह बस जाँच का क्रम है — न कोई नापा हुआ प्रतिशत, न किसी नतीजे का वादा।

प्रवेश द्वार की दिशाएँ, आसान भाषा में

दिशापारंपरिक मान्यता
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)वास्तु की कई परंपराएँ इस दिशा को पसंद करती हैं और इसे ज्ञान, साफ़ सोच और समृद्धि से जोड़ती हैं।
पूर्वपरंपरा से इसे उगते सूरज, जीवन-शक्ति, नई शुरुआत और चहल-पहल से जोड़ा जाता है।
उत्तरपरंपरा से इसे बुध ग्रह, व्यापार, काम-धंधे और समृद्धि से जोड़ा जाता है।
पश्चिमवास्तु के कुछ मत इसे उत्तर और पूर्व से नीचे रखते हैं। कोई उपाय सोचने से पहले देख लें कि आपका द्वार ठीक-ठीक किस पद पर है।
दक्षिणरक्षा करने वाली, पर चुनौती भरी दिशा। शुरू में रुकावटें आती हैं; समय के साथ आप मज़बूत बनते हैं और उन्हें पार कर लेते हैं। हो सके तो इससे बचें।
नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम)सबसे कम अनुकूल दिशा। इससे बड़ी रुकावटें आती हैं — नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) की ओर मुख वाला मुख्य द्वार न रखें। अगर कोई और रास्ता न हो, तो मज़बूत उपाय करने पड़ते हैं।

प्रवेश द्वार के पद और देवता

हर दिशा के प्रवेश द्वार में कई पद होते हैं, और हर पद का एक स्वामी देवता होता है (देखें पद और देवता)। वास्तु परंपराएँ इन्हें सहायक या चुनौती भरा बताती हैं। ये सेहत, पैसे या ज़िंदगी के किसी और नतीजे की भविष्यवाणी नहीं करते।

जो द्वार आदर्श न हो, उसे कैसे सुधारें

हर किसी के घर का द्वार ईशान कोण या पूर्व में हो, यह मुमकिन नहीं। अगर आपका द्वार उतनी अच्छी दिशा में नहीं है, तो भी आपके पास कई रास्ते हैं:

उपायकैसे करें
सुधार के लिए चीज़ें रखनादक्षिण के द्वार पर पानी का छोटा फव्वारा अग्नि की तेज़ ऊर्जा को ठंडा करता है। पश्चिम के द्वार पर दीया रखने से वहाँ रोशनी और चहल-पहल बढ़ती है।
दहलीज़ पर रोज़ की पूजारोज़ दीया जलाएँ, कोई मंत्र पढ़ें — इससे जगह जाग उठती है और अच्छी ऊर्जा आती है।
शुभ चिह्न लगानास्वस्तिक, ॐ या कमल का चिह्न दिव्य ऊर्जा लाता है, और अपने इष्ट देवता या गुरु की तस्वीर भी यही काम करती है।
रंगों से सुधारदक्षिण के द्वार पर नीले या सफ़ेद जैसे ठंडे रंग चाहिए; उत्तर के द्वार पर लाल या नारंगी जैसे गर्म रंग लगाए जा सकते हैं।
पौधेजीवित पौधे बढ़त की ऊर्जा लाते हैं — फूल, तुलसी, बाँस या मनी प्लांट लगाएँ। काँटेदार या ज़हरीले पौधे न लगाएँ।
रोशनीजगमगाता, रोशन द्वार ऊर्जा को बुलाता है। दिन में धूप आए, शाम को हल्की गर्म रोशनी जले। अँधेरा, उदास-सा द्वार न रखें।
साफ़-सफ़ाईरोज़ झाड़ू लगाएँ, और दरवाज़े के ठीक सामने से जूतों का रैक और फ़ालतू सामान हटा दें — साफ़-सुथरा द्वार खुशहाली का स्वागत करता है।

दिशा के हिसाब से

पूर्व — ज़्यादातर घरों के लिए आदर्श। पानी का कोई छोटा-सा फव्वारा या दीया रखें, पीले-सफ़ेद जैसे चटख, गर्म रंग लगाएँ, और रास्ता खुला और रोशन रखें।

पश्चिम — इसमें थोड़ा ज़्यादा ध्यान देना पड़ता है। जल तत्व, नीले या सफ़ेद रंग और अच्छी रोशनी से संतुलन बनाएँ, और शाम को दीया ज़रूर जलाएँ।

उत्तर — कारोबारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए अच्छा। जल तत्व रखें या ऐसा आईना लगाएँ जिसमें पानी दिखे, ठंडे रंग चुनें, और ध्यान रखें कि पानी का बहाव अंदर की ओर हो, बाहर की ओर नहीं।

दक्षिण — सबसे चुनौती भरी दिशा। लगातार जलता दीया, पृथ्वी तत्व वाले उपाय (क्रिस्टल, पत्थर) और ताकत या रक्षा का कोई प्रतीक मदद करते हैं — समय के साथ यह द्वार आपको भीतर से मज़बूत बनाता है, बस सफ़र थोड़ा कठिन होता है।

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