कमरों का वास्तु
हर कमरे का अपना एक काम है — वास्तु उस कमरे को उसी काम के अनुकूल बनाने में मदद करता है।

रसोई
पारंपरिक वास्तु अग्नि तत्व को आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में मानता है और अक्सर चूल्हे के लिए यही जगह पसंद करता है। फिर भी उपकरण ठीक से चले, इसके लिए सुरक्षित फ़िटिंग और हवा की सही निकासी ज़रूरी है।
कहाँ क्या रखें
- हो सके तो चूल्हा या कुकटॉप आग्नेय कोने में रखें
- सिंक उत्तर या ईशान कोण में (पानी आग को संतुलित करता है)
- फ़्रिज आग्नेय कोण या दक्षिण में
- डाइनिंग टेबल पूर्व या ईशान कोण में
ऊर्जा का संतुलन
आग को संतुलन के लिए पानी चाहिए — जिस रसोई में जल तत्व न हो, वहाँ माहौल तीखा हो जाता है और खाने के वक़्त कहा-सुनी होने लगती है। रसोई के उत्तर या ईशान कोने में पानी का कोई स्रोत (सिंक, वॉटर फ़िल्टर) रखें।
काम की बातें
- रसोई साफ़-सुथरी और सलीके से रखें
- काले रंग से बचें — सफ़ेद, पीले या हल्के गर्म रंग लगाएँ
- हवा और रोशनी अच्छी तरह आती रहे
- खाना बनाते समय कभी भी दरवाज़े की ओर पीठ न रहे
- चाकू-छुरी जैसी धारदार चीज़ें नज़रों के ठीक सामने न रखें
अगर आपकी रसोई आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में नहीं है, तो उस कमरे के ही दक्षिण-पूर्वी कोने में खाना बनाने की जगह रखें, और खाना बनाते वक़्त आपका मुँह पूर्व या दक्षिण की ओर हो।
बेडरूम
पारंपरिक वास्तु पृथ्वी तत्व और नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) को स्थिरता, ठहराव और आराम से जोड़ता है।
कहाँ क्या रखें
- पलंग का सिरहाना दक्षिण या पश्चिम की ओर हो (उत्तर या पूर्व की ओर नहीं)
- बेडरूम का दरवाज़ा पूर्व या उत्तर में हो
- भारी फ़र्नीचर दक्षिण या पश्चिम की दीवार के साथ रखें
- हल्का फ़र्नीचर उत्तर या पूर्व की दीवार के साथ रखें
ऊर्जा का संतुलन
बेडरूम में शांत, ठहराव भरी ऊर्जा चाहिए। हल्का आसमानी, क्रीम या हल्का हरा जैसे कोमल रंग लगाएँ — लाल या नारंगी से बचें।
काम की बातें
- इलेक्ट्रॉनिक सामान बेडरूम से बाहर रखें
- सामान और भरमार कम से कम रखें — बेडरूम खुला-खुला लगना चाहिए
- आर-पार हवा आने-जाने और धूप आने का इंतज़ाम रखें
- पलंग के सामने आईना न लगाएँ
- बेडरूम पूर्व या उत्तर की ओर खुलता हो, तो मोटे पर्दे लगाएँ
अगर आपका बेडरूम नैऋत्य कोण में नहीं है, तो भारी फ़र्नीचर और थोड़े गहरे रंगों से कमरे में ठहराव लाएँ, और दक्षिण या पश्चिम की दीवारों को सक्रिय करें।
लिविंग रूम
पारंपरिक वास्तु पूर्व को उगते सूरज से और उत्तर को खुलेपन से जोड़ता है। इसलिए दिन में सबके साथ बैठने वाले कमरों के लिए वास्तु जानकार अक्सर इन्हीं हिस्सों को चुनते हैं।
कहाँ क्या रखें
- लिविंग रूम का दरवाज़ा पूर्व या उत्तर में हो
- बैठने की व्यवस्था ऐसी हो कि मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे
- भारी फ़र्नीचर दक्षिण की दीवारों के साथ रखें
- हल्का, खुला-खुला फ़र्नीचर उत्तर या पूर्व की दीवारों के साथ रखें
ऊर्जा का संतुलन
लिविंग रूम में आते ही अपनापन और ताज़गी महसूस होनी चाहिए। गर्म, पर तीखे नहीं, ऐसे रंग अच्छे रहते हैं — पीला, हल्का हरा, हल्की गर्माहट वाला सफ़ेद।
काम की बातें
- बैठने की जगह गोल या आधे गोले में रखें, ताकि सब आपस में जुड़े रहें
- पौधे और फूल रखें, इनसे कमरे में जान आती है
- हवा का आना-जाना अच्छा रहे
- बीच में कोई ऐसी चीज़ रखें जिस पर नज़र टिके (लैंप, कलाकृति)
- कोई कोना अँधेरा न रहे — रोशनी से हर हिस्से को उजला रखें
पूजा घर
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सबसे शुभ दिशा है — यहाँ दिव्य ऊर्जा सबसे प्रबल होती है और पूजा-साधना में मन गहराई से लगता है।
कहाँ क्या रखें
- हो सके तो पूजा घर ईशान कोने में बनाएँ
- मंदिर या पूजा की जगह का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो
- मूर्ति या पवित्र तस्वीर आँखों की ऊँचाई पर या उससे ऊपर रखें
- साफ़ और थोड़ी ऊँची जगह पर रखें
ऊर्जा का संतुलन
पारंपरिक वास्तु में पूजा घर शांत और साफ़ रखा जाता है। सफ़ेद, सुनहरे रंग और ताज़े फूल यहाँ आमतौर पर शुभ प्रतीक माने जाते हैं।
काम की बातें
- हो सके तो पूजा घर अलग रखें — एक छोटा-सा कोना भी काफ़ी है
- आध्यात्मिक ऊर्जा जगाने के लिए रोज़ दीया जलाएँ
- यहाँ धूप ज़रूर आए
- आस-पास टॉयलेट या कूड़ेदान न हो
- अगरबत्ती या सेज जैसी शुद्ध करने वाली जड़ी-बूटियों का धुआँ करें
बाथरूम
बाथरूम सफ़ाई और पानी की जगह है। आग्नेय कोण (जल + अग्नि) या दक्षिण (जल तत्व), दोनों ही ठीक रहते हैं।
कहाँ क्या रखें
- बाथरूम ईशान कोण से दूर हो
- बाथरूम का दरवाज़ा दक्षिण या पूर्व की ओर खुले
- हो सके तो शावर या टब दक्षिण-पूर्वी या दक्षिणी कोने में हो
- नमी जल्दी निकले, इसके लिए एग्ज़ॉस्ट फ़ैन चलता रहे
ऊर्जा का संतुलन
बाथरूम से गंदगी और फ़ालतू चीज़ें बाहर निकलती हैं — इसलिए हवा की निकासी पूरी रखें और पानी कहीं रुकने न दें। नालियाँ साफ़ रखें, ताकि पानी बहता रहे।
काम की बातें
- बाथरूम एकदम चमकता रखें — सफ़ाई से शुद्धि का असर और बढ़ता है
- सफ़ेद या हल्के नीले जैसे उजले, साफ़ रंग लगाएँ
- ताज़गी के लिए एक छोटा पौधा या कुछ फूल रखें
- रोशनी और हवा की निकासी अच्छी हो
- इस्तेमाल न हो रहा हो, तो बाथरूम का दरवाज़ा बंद रखें
स्टडी रूम
पारंपरिक वास्तु पूर्व को साफ़ सोच से और ईशान कोण को ज्ञान से जोड़ता है। इसीलिए पढ़ाई की जगह के लिए वास्तु जानकार अक्सर इन्हीं दिशाओं को चुनते हैं।
कहाँ क्या रखें
- स्टडी रूम का दरवाज़ा पूर्व या उत्तर में हो
- पढ़ते समय मुँह पूर्व की ओर हो (सबसे अच्छा), या फिर उत्तर की ओर
- बैठने की व्यवस्था ऐसी हो कि मुँह पूर्व या ईशान की ओर रहे
- अलमारियाँ और सामान दक्षिण या पश्चिम की दीवारों के साथ रखें
ऊर्जा का संतुलन
पढ़ाई की जगह में ऐसी ऊर्जा चाहिए जो मन को साफ़ और चौकन्ना रखे। सफ़ेद, हल्का नीला या हल्का पीला अच्छा रहता है; गहरे या भारी रंगों से बचें।
काम की बातें
- मेज़ पर फ़ालतू सामान जमा न होने दें
- दिन में धूप आती रहे
- शाम की पढ़ाई के लिए एक लैंप रखें
- आगे बढ़ने की ऊर्जा के लिए पौधे रखें
- पढ़ाई की जगह में टीवी, फ़ोन या ध्यान भटकाने वाली चीज़ें न रखें